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"जंगलराज से सुशासन तक: बिहार को बदलने वाले नीतीश कुमार के कामकाज पर एक नजर"

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पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की तैयारी के बीच अब उनके कामकाज और उपलब्धियों का आकलन भी राजनीतिक और सामाजिक दोनों ही स्तर पर हो रहा है। करीब ढाई दशक से बिहार की राजनीति का पर्याय बने नीतीश कुमार ने राज्य की तस्वीर ही बदल दी। उनके समर्थक उन्हें प्रधानमंत्री मटेरियल बताते हैं और कई जगहों पर उनके लिए भारत रत्न की मांग उठ चुकी है। उनके शासन में लागू की गई योजनाएं दूसरे राज्यों के लिए मॉडल बन गईं और कई जगहों पर उनके अनुभव को अपनाया गया।
नीतीश कुमार ने 2005 में ‘जंगलराज’ का अंत कर बिहार में कानून का राज स्थापित किया। उन्होंने स्पेशल कोर्ट बनाकर जनवरी 2006 से अगस्त 2010 तक 52,343 अपराधियों को सजा दिलाई, जिसमें कुख्यात बाहुबलियों और पूर्व सांसदों की सजा शामिल थी। इस कदम ने बिहार को अपराध मुक्त और सुरक्षित राज्य की दिशा में अग्रसर किया।
बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। सड़क, बिजली, पुल और ग्रामीण कनेक्टिविटी के माध्यम से उन्होंने राज्य को हर क्षेत्र में जोड़ने का काम किया। बिजली आपूर्ति और जल संरचना में सुधार के साथ ही ग्रामीण इलाकों तक सुविधाएं पहुंचाना उनके शासन की विशेषता रही।
महिलाओं के सशक्तिकरण में नीतीश कुमार की भूमिका भी प्रेरणादायक रही। उन्होंने 2006 में बालिका साइकिल योजना शुरू की, जिससे लाखों लड़कियों को शिक्षा में बढ़ावा मिला। पंचायती राज और नगर निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया और सरकारी नौकरियों में 35 प्रतिशत कोटा लागू किया।
नीतीश कुमार ने महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए 2006-07 में जीविका परियोजना की शुरुआत की। यह योजना देशभर में आदर्श मानी गई, जिससे ग्रामीण महिलाएं स्वरोजगार और आय के साधन पा सकीं। उन्होंने महिलाओं के स्वरोजगार के लिए वित्तीय सहायता भी प्रदान की, जिससे उनका सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण हुआ।
2016 में बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू कर उन्होंने महिलाओं और परिवारों की सुरक्षा और आर्थिक स्थिति में सुधार किया। शराबबंदी से राज्य का राजस्व प्रभावित हुआ, लेकिन नीतीश ने अपने फैसले पर अडिग रहते हुए इसे महिलाओं के हित में लागू रखा।
जाति आधारित गणना कराना और महादलित आयोग का गठन करना भी उनके उल्लेखनीय कदम रहे। बिहार में पहली बार जाति गणना कराकर उन्होंने गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों की पहचान कर उन्हें सरकारी मदद प्रदान की। महादलित आयोग और महादलित विकास मिशन के जरिए पिछड़े और कमजोर वर्गों को मुख्यधारा में लाने का काम किया।
नीतीश ने पसमांदा मुसलमानों के लिए विशेष योजनाएं लागू कीं, जिससे उन्हें शिक्षा, आवास और वित्तीय मदद मिली। इसके साथ ही उनका राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हुआ और इस वर्ग से आने वाले नेताओं को राज्यसभा में भेजा गया।
शासन संचालन में गठबंधन सरकारों के साथ उनका अनुभव भी अनुपम रहा। एनडीए के साथ लगातार 20 साल तक गठबंधन सरकार का नेतृत्व करना, राज्य की स्थिरता बनाए रखना और गठबंधन बदलते हुए भी सत्ता बनाए रखना नीतीश कुमार की राजनीतिक दक्षता का परिचायक है।
राज्यसभा जाने के बाद नीतीश कुमार के इन कार्यों और उपलब्धियों का आकलन राष्ट्रीय स्तर पर भी किया जाएगा। उनके शासन के मॉडल ने बिहार को न केवल अपराध मुक्त और सुशासित बनाया, बल्कि विकास और सामाजिक समरसता की मिसाल भी कायम की। नीतीश कुमार की योजनाएं और उनका राजनीतिक दृष्टिकोण आने वाले समय में भी कई राज्यों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे।

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